GRAP लगने पर भट्टा बंद — कितने दिन का नुक़सान, और तैयारी क्या
झज्जर, रोहतक, सोनीपत और गुरुग्राम — चारों NCR में हैं। सर्दियों में GRAP का तीसरा चरण लगते ही भट्टा बंद। बंद के दिनों में भी पेशगी चलती है और कोयला पड़ा रहता है।
सर्दी में हवा ख़राब होते ही NCR में GRAP लागू होता है। तीसरे चरण में ईंट भट्टे बंद कर दिए जाते हैं, अक्सर बिना ज़्यादा नोटिस के।
मालिक के लिए हिसाब ये है: बंद के दिनों में भी मज़दूर की पेशगी चलती है, कोयला गोदाम में पड़ा रहता है, और जो राउंड बीच में है उसका ईंधन बेकार जलता है। चार दिन का बंद अक्सर एक पूरे राउंड जितना महँगा पड़ता है।
तैयारी तीन चीज़ों की होती है। पहली — राउंड की टाइमिंग: जिन हफ़्तों में हवा बिगड़ने की उम्मीद हो, उनमें नया राउंड शुरू करने से बेहतर है चालू राउंड निकाल लेना। दूसरी — कोयले का स्टॉक: बंद से ठीक पहले बड़ा लोड मँगाना पैसा फँसाना है। तीसरी — मज़दूरी का हिसाब: बंद के दिन साफ़ दर्ज हों, वरना सीज़न के आख़िर में यही झगड़े की जड़ बनते हैं।
ज़िगज़ैग में बदले हुए भट्टों को कुछ चरणों में छूट मिलती है। अगर अभी नहीं बदला है, तो अगला सीज़न शुरू होने से पहले का वक़्त ही सही वक़्त है।